शनिवार, 7 फ़रवरी 2026

Indra Gandhi peace prize 2025/इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार 2025

इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार 2025

स्थापना - 1986 में

यह पुरस्कार  भारत के प्रथम महिला प्रधानमंत्री श्रीमति इंदिरा गांधी के याद में " इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्रस्ट" के द्वारा प्रदान किया जाता है।

क्षेत्र - यह पुरस्कार अंतरराष्ट्रीय शांति , विकास, निरस्त्रीकरण और न‌ई अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था को बढ़ावा देने के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान हेतु दिया जाता है।

पुरस्कार राशि - 1करोड़ नकद पुरस्कार ,  एक ट्राफी और प्रशस्ति पत्र दिया है।

Note :- पहले इसकी राशि 25 लाख थी ।

2025 में ग्राका माशेल ( मानवाधिकार कार्यकर्ता) को यह पुरस्कार प्रदान किया गया है। ( * ग्राका माशेल मोज़ाम्बिक देश की रहने वाली है।)


अबतक प्राप्त किसी भारतीय संस्था या व्यक्तियों की सूची जिसे "इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार" प्राप्त है:- 

• IMA ( Indian Medical Association) And TNAI ( Trained Nurses Association of India) - 2022

NGO PRATHAM ( 2021)

Centre For Science And Environment ( 2018 )

डॉ. मनमोहन सिंह ( 2017 )

ISRO (  Indian Space Research Organisation) - 2014 

Ela Bhatt (2011) 

M.Swaminathan (1999)

Rajiv Gandhi ( 1991) 

कुछ अन्य महत्वपूर्ण तथ्य:- 

* प्रथम विजेता - वैश्विक कारवाई के लिए संसद

* प्रथम व्यक्ति - मिखाईल गोर्बाचेव

* प्रथम भारतीय विजेता - राजीव गांधी

* UNICEF ( 1989)  और UNHCR ( 2015) को भी यह

 पुरस्कार प्रदान किया गया है।


                               Written By ( Lakshman Tudu)

      





शुक्रवार, 19 सितंबर 2025

17th BRICS SUMMIT 2025/ 17वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2025


 इस Topic में  मैं आप सबको 17वां BRICS SUMMIT से संबंधित कुछ Important Fact बताऊंगा जो Railway/SSC/ STATE PCS   जैसे Exam हेतु अति महत्वपूर्ण माना जाता है , जिसमें हर बार हमें 1 प्रश्न जरूर देखने को मिलती है.....तो आइए, जानते हैं......








BRICS क्या है ?

- BRICS उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों का एक समूह है।

Hosting :- इसबार 17वां BRICS SUMMIT का आयोजन ब्राजील के रियो डी जेनेरियो शहर में किया गया था!!

थीम :- " अधिक समावेशी और टिकाऊ शासन के लिए विश्वैक दक्षिण सहयोग को मजबूत करना है ।


⭐ इसमें सम्मिलित कुल देशों की संख्या 10 है, जिसमें Brazil, Russia, India, China , south Africa जैसे बड़े देश शामिल हैं...... इसके अलावा 5 अन्य नये देशों को भी इसमें शामिल किया गया है , वे देश हैं:- Egypt, Ehiopia , Indonesia, Iran, United Arab Emirates शामिल हैं!!!

इनमें से Indonesia को हाॅल ही में जनवरी 2025 में BRICS संगठनों की सूची में शामिल किया गया है।



⭐BRICS से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण बातें:-

⭐ स्थापना:-  2006 में

⭐ मुख्यालय:- शंघाई (चीन )

⭐ BRICS देशों के बैंक :- NDB ( New Development Bank )


⭐ आंकड़ों के मुताबिक ब्रिक्स देशों की कुल जनसंख्या विश्व की कुल जनसंख्या का 45% है और उसकी GDP 35% है।


⭐ प्रथम ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन 2009 में किया गया

 था ।

⭐ BRICS की शुरुआत सन् 2001 में  BRIC के रूप हुई थी और‌ इसमें South Africa को सन् 2010 में शामिल किया गया था ।

⭐ भारत ने अबतक 3 बार इसकी अध्यक्षता की है। [ 4th - 2012 ( New Delhi ) , 8th - 2016 (Goa) , 13th - 2021 ( विश्विक महामारी के कारण virtually Hosted किया गया था।)

Note :- 18वां BRICS शिखर सम्मेलन का आयोजन 2026 में भारत में आयोजित किया जाएगा।

                           Lakshman Tudu ( written by)





मंगलवार, 2 सितंबर 2025

उम्मीदों के किरण



उम्मीदों के किरण


कभी-कभी थक सा जाता हूं मैं 
जिन्दगी की इस रफ्तार से
क्षण भर के लिए रुक सा जाता हूं मैं
अपने हर उस मकसद से जो कभी बचपन में मेरी
इन नन्ही आंखों ने देखी थी ।।


तंग आ गया हूं मैं अपनी हर लापरवाही से
टूट सा गया हूं मैं अपनी हर असफलता से
सहम सा जाता हूं कभी
पता नहीं क्यों इस तरह
मानो अब भी डर लगता हो मुझे
बदलती दुनिया और बदलते हुए लोगों से


दिन बदले, रात बदले
टिक टिक टिक टिक करती घड़ियों के सुई बदले
बने बनाए इंसान भी बदल गया 
पलभर में मौसम की तरह ।।

सबकुछ बुझ सा गया वक्त की आंधियों में,
पर अबतक बुझा ना पायी किरणें उम्मीदों की.....
बुझा ना पायी किरणें उम्मीदों की ।।

                                   Lakshman Tudu ( written By )



 






 









बुधवार, 3 जून 2020

सचिन तेंदुलकर की एक अनकही कहानी// An Untold Story Behind Sachin Tendulkar//Three Generations one hero








                    



सचिन तेंदुलकर की एक अनकही कहानी


अक्सर हममें से ज़्यादातर लोग कठिन परिस्थितियां के आगे आसानी से हार मान लेते हैं या तो उन परिस्थितियों से समझौता कर लेते हैं क्योंकि शायद हमें सरल जीवन जीने की आदत सी हो गई है या तो हमें उन चुनौतियों को स्वीकार करने से डर लगता हो । यहां पर इसके जवाब हर लोगों के अलग-अलग हो सकते हैं, पर कुछ विरले ही ऐसे होते हैं जो दिखने में तो हम सबकी तरह ही सामान्य होते हैं पर उनकी सोच, साहस और उसकी ज़िद्दीपन उन्हें हम सबसे अलग और खास बनाती है ।

अगर आप इतिहास के पन्नों को पलटकर देखें तो आपको आश्चर्य होगा कि ज्यादातर इतिहास इन्हीं लोगों ने रचे हैं ।
किसी ने सच ही कहा है कि समझदार लोग तो केवल रचे हुए इतिहास पढ़ते हैं और इतिहास तो कोई सरफिरा ही रचते हैं ।

सन् 1989 का  वो दिन भला कौन भूल सकता है जहां दो सरहदों की सम्मान "दांव" पर लगी हुई थी ।
दोनों ही देश एक दूसरे को पछाड़ने के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहते थे । वैसे तो ये दोनों ही सरहद आपस में भाईचारा या समझौता का रास्ता आसानी से अपनाना पसंद नहीं करते और इनकी हर फैसला
 "बन्दूक की नोक" या गोला-बारूद से ही होती थी पर आज इनकी फैसला इन सबसे अलग " क्रिकेट के मैदानों "  पर हो रही थी और वो भी बल्ले और गेंद से हो रही थी ।

इन दोनों देशों की लोकप्रियता क्रिकेट के मैदान में इतनी ज्यादा है कि लोग इनकी तुलना "एशेज" जैसी बड़ी सीरीज से भी करने लगते हैं । अब, आप सब समझ ही गए होंगे कि मैं किन दो देशों की बात कर रहा हूं ।
जी हां.... मैं भारत और पाकिस्तान क्रिकेट की उस भयानक घटना की बात कर रहा हूं जहां विपरीत परिस्थितियों के बीच एक चमकता हुआ "सितारा" ने जन्म लिया था


भारत और पाकिस्तान का वह टेस्ट मैच जिसमें पाकिस्तान की ओर से वकार यूनुस, वसीम अकरम जैसे बड़े दिग्गज खिलाड़ी खेल रहे थे जो उस वक्त उनकी जोड़ी दुनिया के टॉप गेंदबाजों की लिस्ट में गिने जाते थे । उनकी इस जोड़ी के आगे आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड जैसी बड़ी टीमें भी डरती थी क्योंकि उनकी हर गेंदें 150Km/hr - 160/hr की रफ्तार से बल्लेबाजों के सामने आग उगलती हुई आती थी और जिसका सामना करना किसी भी बल्लेबाजों के लिए आसान नहीं था ।
उस टेस्ट मैच का वह आखिरी दिन था और भारत मैच आसानी से हारने के कगार पर था या यूं कहें कि भारत का मैच हारना तय था क्योंकि उनकी आधी से ज्यादा खिलाड़ी पैवेलियन लौट चुकी थी और अगर नवजोत सिंह सिद्धू को छोड़ दिया जाए तो कोई भी ऐसा बल्लेबाज नहीं बचा था जिनके पास ज्यादा अनुभव हो....ऐसे में भारत का हारना लगभग तय हो चुका था ।
एक तरफ जहां भारत की नाज़ुक सी बल्लेबाजों की छोटी सी टुकड़ी थी जिसमें नवजोत सिंह सिद्धू के बाद सिर्फ गेंदबाज बचे हुए थे और दूसरी ओर वसीम अकरम और वकार यूनुस की रफ्तार भरी गेंदों का "खौफ" था ....!!!

तभी महज 16 साल का एक लड़का क्रीज पर आता है और सामने थे वकार यूनुस ।
वकार की पहली गेंद तो किसी तरह निकल जाती है पर 
अगली गेंद पिच पर टप्पा खाकर सीधे उस लड़के के नाक पर जा लगती है और वह बुरी तरह घायल हो जाता है ।
उस वक्त वह महज 16 साल का था जब वह अपनी मौत और जिन्दगी से जंग लड़ रहा था और उनकी लाईव screening  हर घर के TV screen पर दिखाया जा रहा था ।
लोग उनकी जीवन के लिए "रब" से दुआएं मांग रही थी पर वह लड़का अपनी "जिन्दगी" की परवाह किए बिना उन करोड़ों लोगों के लिए मौत से जंग लड़ रहा था जो  cricket को भगवान की तरह पूजते हैं ।
मैंदान के चारों ओर सन्नाटा था और मैदान के बीचों बीच वह लड़का जमीन पर गिरा पड़ा था ।
उनके नाक से खून बह रहा था और वह खून से लूहलूहान हो चुका था और उनके शरीर में इतनी-सी भी शक्ति नहीं थी कि वह अपने पैरों के दम पर उठ खड़ा हो सके ।
तभी कुछ डॉक्टर और खिलाड़ी दौड़कर उनकी मदद के लिए वहां आते हैं और उन्हें आराम करने या रिटायर हर्ट होकर पवेलियन लौट जाने के लिए कहते हैं ।
हर भारतीय दर्शकों की आखिरी उम्मीदें भी टूटती हुई नजर आ रही थी ।
लोग अपनी-अपनी सीटें छोड़कर जाने की तैयारी में थे क्योंकि उन्हें साफ-साफ लगने लगा था कि भारत मैच आसानी से हारने वाला है ।

पर कहते हैं ना कि जिसमें अपने वतन के प्रति प्यार हो वह अपनी खुद की परवाह करने से पहले अपने वतन की परवाह करते हैं और हुआ भी यही.....!!!!
तभी मैदान पर गिरे हुए बेजान सी पड़ी उस लड़के के मुंह से आवाज आई :-
" मैं खेलूंगा.......!!!!"

और वह लड़का एकाएक फिर से क्रीज़ पर खड़ा हो जाता है ।
यह देखकर पूरा स्टेडियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजने लगती है मानो ऐसे लगने लगता है कि एक मुरझाए हुए चेहरों को एक नई मुस्कान मिल गई हो ।
और वकार यूनुस की अगली ही "गेंद" को वह सीमा रेखा के बाहर चार रन के लिए भेजता है और इसबार लोग दुगुनी उत्साह के साथ खड़े होकर उस लड़के की हौसला अफजाई कर रहे थे।
वह लड़का ना सिर्फ वकार, वसीम की गेंदों का डटकर सामना किया बल्कि वह मैच के अंत तक क्रीज पर एक चट्टान की तरह डटे रहे और आखिरकार उसने नवजोत सिंह सिद्धू के साथ 101 रनों की बड़ी साझेदारी करते हुए भारत को हारने से बचाया । इसकी किसी ने भी कल्पना नहीं की थी कि भारत हारा हुआ मैच भी "ड्रा" खेल सकता है पर उस काम को महज 16 साल के उस लड़के ने कर दिखाया जो उस वक्त किसी ने नहीं कर पाया था ।
भले ही उस वक्त लोगों को यह कोई चमत्कार सा लगे पर वह चमत्कार नहीं हकीकत था जो एक व्यक्ति की अटल निष्ठा और
उसके देश के प्रति प्रेम को दर्शाता है ।

 यह लड़का कोई और नहीं बल्कि सचिन रमेश तेंदुलकर था जो आगे चलकर पूरे विश्वभर में क्रिकेट रिकॉर्डों की अंबार लगा दी और पूरे विश्वभर में  "मास्टर ब्लास्टर"/ "क्रिकेट के भगवान" आदि के नाम से प्रसिद्ध हुआ

अगर वह उस दिन कठिन परिस्थितियों से समझौता कर लेता तो शायद ही देश को कभी कोई सचिन तेंदुलकर मिल पाता ।
इसलिए हर कठिन परिस्थितियों से डरकर भागे नहीं बल्कि उनका डटकर सामना करें क्योंकि कठिन परिस्थितियों में ही हमारी असली "व्यक्तित्व" की असली पहचान होती है ।



तो Friends कैसी थी मेरी आज की ये post कमेंट बॉक्स में कमेंट करके जरूर बताएं और हां post अच्छा लगे तो post को Like और share जरूर करें । 

Thanks.....!!!




                                                 written By 

                                           Lakshman Tudu
















मंगलवार, 2 जून 2020

olympic games -2020 | History , complete winner List |



नमस्कार दोस्तों.....!!
मैं Lakshman Tudu आप सबके बीच एक लंबे अरसे के बाद एक और नये Topic के साथ आया हूं और मुझे आशा है कि ये Topic भी आप सबके लिए बहुत ही ज्यादा फायदेमंद साबित होने वाली है क्योंकि ये Topic मैंने खासकर प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे विधार्थियों के लिए लिखा हूं ।
मैंने इस लेख में उन चीजों को ज्यादा तवज्जो दी है जो प्रतियोगिता परीक्षा के नजरों से बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण मानी जाती है ।।
तो चलिए विस्तार से जानते हैं आज के इस नये Topic को ताकि इनसे प्रश्न आये तो एक भी प्रश्न ना छूटे ।।

ओलंपिक खेल (Olympic games)

इस खेल की शुरुआत प्राचीन काल में यूनान के एक शहर "ओलम्पिया" में सन् 776 ईसा पूर्व की गई थी और अगर आधुनिक olympic games की बात करें तो इनकी शुरुआत सन् 1896 ई० में यूनान के ही एक शहर "एथेंस" से प्रारंभ की गई थी ।
ओलंपिक खेल का मुख्य उद्देश्य :-
इसका मुख्य उद्देश्य विश्व भर में खेल के माध्यम से हर एक देश का अपना वर्चस्व स्थापित करना है यानी कि खुद को अन्य देशों की तुलना में बेहतर साबित करना ।
 जैसे:- ( तेज,ऊंचा, बलवान )


कुछ प्रमुख बातें जो olympic games से जुड़ी हुई है :-


अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति का गठन-   सन् 1894 ई० में
    
मुख्यालय :-  लोसाने, स्विट्ज़रलैंड

कुल सदस्य - 11
 ( 1 अध्यक्ष, 3 उपाध्यक्ष, 7 अन्य सदस्य)

प्रथम अध्यक्ष :- डिमेट्रियास विकेलास ( यूनान )

वर्तमान अध्यक्ष:-  थॉमस बाॅक ( जर्मन के निवासी) 

विश्व ओलंपिक दिवस :- 23 जून 
आधुनिक ओलंपिक खेलों के जन्मदाता :-  पियरे डि कोबर्टिन

Olympic Flag (ओलंपिक ध्वज) :-  olympic Flag को सर्वोत्तम olympic आदर्शों में से एक गिना जाता है ।
इसका श्रेय बैरोन पियरे डि कोबर्टिन को जाता है और इन्हीं के द्वारा सन् 1913 ई० में पहली बार निर्माण किया गया था । सर्वप्रथम इस ध्वज को सन् 1920 में हुए एंटवर्प ओलंपिक में फहराया गया था ।
इसकी पृष्ठभूमि सफेद है पर  खास बात यह है कि इसमें ध्वज के मध्य में पांच रंगीन प्रतीक के रूप में मौजूद हैं जो विश्व के पांच महाद्वीपों को इंगित करता है । नीचे मैंने उन महाद्वीपों के नाम दिए हैं:-
नीला - यूरोप
पीला - एशिया
काला- अफ्रीका
हरा - आस्ट्रेलिया
लाल- उत्तर एवं दक्षिण अमेरिका

ओलंपिक में भारत

✍️1. भारतीय ओलंपिक परिषद की स्थापना सन् 1924 ई० में की गई थी जिसके प्रथम अध्यक्ष सर जे० जे० टाटा थे और अगर भारतीय ओलंपिक संघ की बात करें तो इसकी स्थापना सन 1927 ई० में हुई थी और इसके प्रथम अध्यक्ष दोराबजी टाटा थे ।

✍️भारतीय ओलंपिक संघ का मुख्यालय :- नई दिल्ली

✍️ भारतीय ओलंपिक संघ का वर्तमान अध्यक्ष:- 
डॉ. नरिंदर ध्रुव बत्रा ( 14 दिसंबर 2017 से अब तक)

✍️ भारतीय ओलंपिक संघ के प्रथम महासचिव :- डॉ.ए.जी. नोहरेन
✍️ भारतीय ओलंपिक संघ के वर्तमान महासचिव :-राजीव मेहता ( 9 फरवरी 2014 से अब तक )

✍️ 2. भारत की ओर से ओलंपिक में पदक जीतने वाले प्रथम पुरुष- नॉर्मन प्रिचार्ड, सन् 1900 ई० में ( 2 रजत पदक)

( Note :- नाॅर्मन प्रिचार्ड  भारत की ओर से ओलंपिक में भाग लेने वाले प्रथम व्यक्ति भी थे । )

✍️ 3. भारत की ओर से ओलंपिक में भाग लेने वाली प्रथम महिला :- मेरी लीला राव , सन 1956 में 

✍️4. भारत ने अब तक ओलंपिक में कुल कितने पदक जीते हैं ? 
- कुल 28 पदक (  9 स्वर्ण , 7 रजत, 12 कांस्य )

✍️5. भारत की ओर से ओलंपिक में पदक जीतने वाले प्रथम भारतीय महिला - कर्णम मल्लेश्वरी

✍️ 6. भारत ने ओलंपिक में अपना पहला सर्वप्रथम पदक कब जीता था ? - सन 1928 में
( एम्स्टर्डम ओलंपिक में हॉकी के क्षेत्र में )

✍️ 7. भारत की ओर से व्यक्तिगत तौर पर ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले प्रथम व्यक्ति - अभिनव बिंद्रा
( सन् 2008 के बीजिंग ओलंपिक में शूटिंग के क्षेत्र में स्वर्ण पदक जीता था । )

✍️8. भारत ने अब तक ओलंपिक में सर्वाधिक पदक किस क्षेत्र में जीता है ?   - हॉकी में ( कुल 11 पदक) 

✍️ 9. भारत की ओर से ओलंपिक में किस भारतीय खिलाड़ी ने लगातार दो बार पदक जीता है ? - सुशील कुमार

✍️10. भारत ने किस ओलंपिक में सर्वाधिक पदक जीता था ?
   - 2012 के लंदन ओलंपिक में कुल 6 पदक
 ( 2 रजत, 4 कांस्य )

Note :-

✍️ ओलंपिक समिति संघ के सदस्य के तौर पर चुनी जाने वाली प्रथम भारतीय महिला - नीता अंबानी ( 2016 में )

✍️ ओलंपिक समिति संघ के सदस्य के तौर पर चुने जाने वाले प्रथम भारतीय पुरुष - राजू रणधीर सिंह ( 2001 में )


हाॅल ही के ओलंपिक में भारत का प्रदर्शन :-

 * बीजिंग ओलंपिक 2008 ( 29वां ) - 3 पदक 
                                    ( 1 स्वर्ण 2 कांस्य )

 * लंदन ओलंपिक 2012 ( 30वां ) - 6 पदक
                                    ( 2 रजत 4 कांस्य )
        
 * रियो ओलंपिक 2016( 31वां ) - 2 पदक 
                                    ( 1 रजत 1कांस्य )

आगामी ओलंपिक खेलों की सूची :-

32वां ओलंपिक खेलों का आयोजन 2020 में टोक्यो में आयोजित होनी थी जो करोना की वजह से स्थगित कर दिया गया है ।


ओलंपिक के कुछ दिलचस्प आंकड़ें और तथ्य :-
 
📝 1. ओलंपिक खेलों का टीवी प्रसारण सर्वप्रथम किस ओलंपिक से शुरू किया गया था ? - सन् 1960 के रोम ओलंपिक से

📝 2. ओलंपिक खेलों में महिलाओं को भाग लेने की अनुमति कब मिली थी ? - सन् 1900 ई० में


📝 3. ओलंपिक में सर्वाधिक पदक जीतने वाले एकमात्र पुरूष खिलाड़ी - माइकल फ्लेप्स ( USA के निवासी )
 ( कुल 28 पदक जिसमें से 23 स्वर्ण पदक 3 रजत पदक और 2 कांस्य पदक )
( Note :- माइकल फ्लेप्स को ही गोल्डन शार्क का उपनाम दिया गया है । )

📝4. ओलंपिक में सर्वाधिक पदक जीतने वाली महिला खिलाड़ी :- लरीना लाव्यनीना 
 ( कुल 18 पदक जिसमें से 9 स्वर्ण पदक 5 रजत पदक और 4 कांस्य पदक )

📝 5. किसी भी ओलंपिक में सर्वाधिक स्वर्ण पदक जीतने का रिकॉर्ड किस देश के नाम दर्ज हैं ? - रूस
( रूस ने सन् 1988 के सियोल ओलंपिक में सर्वाधिक 55 स्वर्ण पदक जीते थे )

📝6. लंदन पहला शहर है जिसने तीन ओलंपिक खेलों
 ( 1908, 1948 एवं 2012) की मेजबानी की है ।

📝7. लगातार तीन ओलंपिक खेलों में 100 मीटर व 200 मीटर की दौड़ में विश्व रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीतने वाले एकमात्र खिलाड़ी -  उसैन बोल्ट
 ( 2008 में बीजिंग ओलंपिक, 2012 में लंदन ओलंपिक, 2016 में रियो ओलंपिक में )

उसके साथ साथ उसैन बोल्ट ने लगातार दो ओलंपिक खेलों के 4× 100 मी. रिले दौड़ में भी विश्व रिकॉर्ड के साथ 2 स्वर्ण पदक जीते हैं और इसी के साथ उन्होंने कुल 8 स्वर्ण पदक जीते हैं ।
( 2012 के लंदन ओलंपिक और 2016 के रियो ओलंपिक में 4×100 मी. रिले दौड़ में उन्होंने लगातार 2 स्वर्ण पदक हासिल किया था । )

( Note :- एक धावक के तौर पर सर्वाधिक स्वर्ण पदक जीतने का श्रेय भी उसैन बोल्ट को ही जाता है । )
📝 8. ओलंपिक खेलोंं में सर्वप्रथम 100 मीटर व 200 मीटर की दोनों दौड़ में एकसाथ स्वर्ण पदक किसने जीता था ?
- कार्ल लुईस ( सन् 1984 के लाॅस एंजिल्स ओलंपिक खेलों में उन्होंने यह कारनामा किया था । )

📝 9. आधुनिक ओलंपिक खेलों में सर्वप्रथम स्वर्ण पदक किस खिलाड़ी ने जीता था ? - थॉमस बुर्के ने

📝10. साल 1916, 1940 और 1944 ई० में ओलंपिक खेलों को विश्व युद्ध की वजह से स्थगित कर दिया गया था ।

31वां ओलंपिक खेल - 2016 

✍️ आयोजन :- रियो, ब्राजील में 
 
* कुल देश :- 207     
* कुल खेलों की संख्या :-  28  * कुल प्रतिस्पर्धा :- 306

✍️ Moto :- A New world 

✍️ Theme song :- Soul And world

✍️ Mascot :-  Vinicus  

( यह ब्राजील के एक प्रसिद्ध Musician Vinicus De Moraes के नाम पर रखा गया था । )

1st Rank - अमेरिका ( 121 मेडल )

भारत का रैंक :- 67th  ( 2 मेडल ) 
( भारत की ओर से यह पदक साक्षी मलिक ने कुश्ती में कांस्य पदक और पीवी सिंधु ने बैडमिंटन में रजत पदक जीता था । )


✍️ भारत की ओर से शुभारंभ में ध्वजवाहक के तौर पर भारतीय खिलाड़ियों की अगुवाई 2008 के ओलंपिक में शूटिंग के स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा कर रहे थे और ओलंपिक  के समापन समारोह में एक ध्वजवाहक के तौर पर भारतीय खिलाड़ियों की अगुवाई 2016 ओलंपिक के कुश्ती में कांस्य पदक विजेता साक्षी मलिक कर रही थी ।

✍️ उद्घाटन और समापन समारोह का आयोजन मारकाना स्टेडियम में किया गया था ।

✍️ Rosovo , South Sudan और Refugee तीन प्रथम ऐसे देश हैं जिन्होंने पहली बार ओलंपिक खेलों में हिस्सा लिया ।

✍️ 2016 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों में भाग लेने वाली सबसे युवा खिलाड़ी कौन थी ? - Gaurika Singh 
( वह नेपाल की रहने वाली है जिन्होंने महज 13 साल की उम्र में 31वें ओलंपिक खेलों में हिस्सा लिया । )

✍️ 2016 के ओलंपिक खेलों में किन दो खेलों को सम्मिलित किया गया था ? 
- गोल्फ और रग्बी

✍️2016 के ओलंपिक खेलों में सर्वप्रथम स्वर्ण पदक किस खिलाड़ी ने जीता था ? -  Virginia Thrasher ने
 ( 10 मी. एयर राइफल स्पर्धा में )

✍️ रियो ओलंपिक 2016 के Logo का डिजाइन किसने किया था ? -  फ्रेड गिली ने

✍️ 2016 के ओलंपिक खेलों में Fiji, Jordan और Rosovo ये प्रथम तीन ऐसे देश हैं जिन्होंने ओलंपिक खेलों में पहली बार पदक जीते हैं ।

✍️ 2016 ओलंपिक खेलों में भारत की ओर से 
Goodwill Ambassador कौन-कौन थे ?
 - सचिन तेंदुलकर, अभिनव बिंद्रा, सलमान खान और ए आर रहमान

✍️ 2016 के ओलंपिक खेलों में कितने देशों ने कोई पदक नहीं जीता था ? - 120 देशों ने


तो ये थे ओलंपिक खेलों से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न जो मैंने आप सबको शेयर किया और हां आप सबको मेरी ये पोस्ट कैसी लगी ?....... मुझे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके जरूर बताएं ताकि मुझे ऐसे ही पोस्ट लिखने के लिए आप सबका साथ और मोटिवेशन मिलता रहे और हां.. पोस्ट अच्छा लगे तो इसे लोगों के बीच शेयर करना ना भूलें ।

Thanks...!!!


                                 written By
                                Lakshman Tudu









रविवार, 5 अप्रैल 2020

प्राकृतिक की खूबसूरत दुनिया में

प्राकृतिक की खूबसूरत दुनिया में




शाम हो चली थी, सभी पक्षियां अपने-अपने घौंसला की ओर लौट रही थी । सूरज की लालिमा धीर-धीरे अंधेरों में विलीन हो रही थी और सूरज खुद पहाड़ों की वादियों में छुपती जा रही थी मानो वह आखिरी बार अलविदा कह कर जा रहा हो...... दूर खेलते बच्चों की किलकारियां अब थोड़ी-सी मंद पड़ गई थी शायद अब वह भी अपने-अपने घरों की ओर प्रस्थान कर चुके थे।

अब बारी थी बहती हवाओं की जो शायद वह भी अपनी ही बारी की इंतजार में थी और मंद-मंद मुस्कराते हुए खुबसूरत फूलों को छूकर निकल जाती है और अपने साथ फूलों की मनमोहक खुशबुओं को साथ लेकर आसपास के वातावरण में बांटती फिरती है । ऐसा लग रहा था मानो जैसे वह उस खूबसूरत खुशबुओं वाली फूलों के "अच्छे गुणों" के बारे में अपने आस-पड़ोस के लोगों को बता रही हो ।

और जहां "अच्छे गुण" हों वहां भीड़ लगनी तो लाजमी ही थी शायद यही वजह है कि अब भी वहां पर सैंकड़ों तितलियां-भौंरा और चिंटियों की भीड़ लगी हुई थी ।
एक दिलचस्प बात यह भी थी कि वहां पर गिलहरियों की एक छोटी-सी टोली भी दिख रही थी जो एक खूबसूरत और सुखी परिवार होने  की मिसालें  दे रही थी । वहां पर मौजूद हजारों
चिटियां लगातार अपने कामों में व्यस्त थी और वह मिलजुलकर उस काम को करने में जुटी हुई थी और जैसे-जैसे समय बितता जाता वैसे ही वह अपने कामों की रफ्तार को और बढ़ाने की कोशिश करते मानो वह आज के काम को कल के रूप में नहीं टालना चाहते हों ।
चिंटियों की अपने कामों के प्रति अटल निष्ठा और एकता वाली गुण मुझे बहुत ज्यादा पसंद आया ।

मैं घर के बाहर एक ऊंची चट्टान पर बैठकर ये सब नजारा देख रहा था और मन ही मन मैं अपने आप पर मुस्करा रहा था कि कितनी अजीब है ये दुनिया सब पलभर के लिए आते हैं और अपने-अपने कर्म करके वापस लौट जाते हैं इस झूठे उम्मीद के साथ कि फिर कल वापस आयेंगे ।

लेकिन सच कहूं तो आज मैंने प्राकृतिक की लिलाओं से बहुत कुछ सीखा जो मन में एक गहरी छाप छोड़ दी थी और मुझे एक अच्छे *इंसान* बनने के लिए प्रेरित कर रहे थे जो कभी मैंने किताबों से नहीं सीखा था वह आज मैं अपने आंखों के सामने हूबहू देख रहा था ।

काश !
हम सभी मानव भी लोभ, लालच, छल-कपट की भावनाओं को त्याग कर प्यार, एकता, मानवता की गुण अपनाकर इनकी तरह जीना सीखें तो कितना अच्छा होता ।
शायद, आज *मानवता* के गुण-गान हर जगह होती और हर कोई इसके समान भागीदार बनते ।

मैं आगे सोच ही रहा था कि मां की आवाज़ आ जाती है :- बेटा ! वहां क्या कर रहे हो ????
देखो बाबूजी काम से आ गये हैं ।
फिर मैं आ रहा हूं मां कहकर अपने घरों की ओर चल पड़ा ।

घर पहुंचकर मैं अपने पापा से मिला फिर ध्यान मग्न होकर अपने पढ़ाई पर जुट गया ।
पर आज मैं सच में बहुत खुश था क्योंकि मेरा मन शांत और प्रफुल्लित होकर खिल रहा था शायद वर्षों बाद मैंने फिर से अपने आप को "अपनी खूबसूरत दुनिया" में जो पाया है ।


तो ये थे दोस्तों मेरे post ....... और हां Comment Box में जरूर बताना आप सबको कैसे लगी मेरी ये post ताकि मैं इस तरह के post हमेशा आपलोगों के लिए लिखता रहूं ।
                                               
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                                       Lakshman Tudu

शुक्रवार, 3 अप्रैल 2020

Nobel prize /नोबेल पुरस्कार




नोबेल पुरस्कार 2019-20

यह पुरस्कार स्वीडेन के वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल की याद में प्रत्येक वर्ष 10 दिसंबर को उनकी पुण्यतिथि के मौके पर दिया जाता है ।

क्यों और किसके लिए दिया जाता है ?

यह पुरस्कार उनकी मृत्यु के पश्चात मिली वसीयत के अनुसार
विज्ञान, साहित्य, शांति और अर्थशास्त्र में उत्कृष्ट योगदान हेतु दिया जाता है ।


अल्फ्रेड नोबेल के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी

   नाम :- अल्फ्रेड बर्नाहार्ड नोबेल
   जन्म:- सन् 1833 ई० में
   मृत्यु :- 10 दिसंबर 1896
   कार्य:- ( वैज्ञानिक और केमिकल इंजीनियर)
प्रमुख खोज :- डायनामाइट

✍️ Note :- वर्तमान में यह पुरस्कार छ: विषयों में दिया जाता है।
हालांकि, इससे पहले यह पुरस्कार पांच विषयों में दिया जाता था परन्तु सन् 1967 ई० में अल्फ्रेड नोबेल के 300वीं वर्षगांठ
के उपलक्ष्य पर " अर्थशास्त्र" को भी इस सूची में शामिल किया गया ।


1st Nobel prize 1901

* नोबेल पुरस्कार के सर्वप्रथम विजेता 

 विषय                            विजेता                                    
 1. भौतिक  -  Wilhlem Cornard Rontgen
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2. रसायन  -  Jacobus Henricus Van't Hoff

3. चिकित्सा -  Emil Von Behring

4. साहित्य -  Sully Prodhomme

5. शांति -    Jean Henry Durant And Frederic 
                                                              pessy

6. अर्थशास्त्र - Ragnar Frisch ( 1969 में यह पुरस्कार आफिशियली तौर पर पहली बार दिया गया था । )

नोबेल पुरस्कार विजेता प्रथम भारतीय


     विषय           विजेता           साल    कार्य / खोज हेतु

1.   साहित्य     रवीन्द्र नाथ टैगोर   1913      गीतांजलि  


2. रसायन       सी०वी० रमन        1930      रमन प्रभाव

3. चिकित्सा    हरगोविंद खुराना    1968      कृत्रिम जीन


4.  शांति       मदर टेरेसा             1979       समाज सेवा


 5. भौतिक   सुब्रमण्यम चन्द्रशेखर 1983    चन्द्रशेखर सीमा

6. अर्थशास्त्र  अमर्त्य सेन             1998       कल्याणकारी                                                                  अर्थशास्त्र


Note :- कुछ अन्य भारतीय जिन्हें यह पुरस्कार प्राप्त है वी० एस० नायपॉल को साहित्य के क्षेत्र में , वेंकटरमण रामकृष्णन को रसायन के क्षेत्र में, कैलाश सत्यार्थी को "बचपन बचाओ अभियान" के तहत शांति के क्षेत्र में यह पुरस्कार मिला है।
✍️अगर हाॅलही की बात करें तो सन् 2019 में अभिजीत बनर्जी को भारत की ओर से शांति के क्षेत्र में यह पुरस्कार दिया गया है ।


दो बार नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले व्यक्ति


1. मैडम क्यूरी - सन् 1903 ई० में रेडियो सक्रियता
 ( भौतिक) की खोज के लिए और सन् 1911 में रेडियम (रसायन) की खोज के लिए ।

2. वीनस पाॅलिंग 

3. जाॅन  बारडीन 

4. फ्रेडरिक सेंगर 








नोबेल पुरस्कार 2019-20 के विजेता



                              
                 

1. भौतिक :-                            



 * जेम्स पीबल्स   - ब्रह्मांड विज्ञान पर नये  सिध्दांत रखने हेतु इन्हें भौतिकी का नोबेल पुरस्कार दिया गया ।

               
* माइकल मेयर और  * डिडियर क्वेलोज -  इन्होंने सौरमंडल से परे एक और अन्य ग्रह की खोज की जिसके कारण उन्हें संयुक्त रूप से भौतिकी का नोबेल पुरस्कार दिया गया है ।



2. रसायन :-   


  रसायन विज्ञान के क्षेत्र में इस बार तीन व्यक्तियों को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है:-
 (* जाॅन बी गुड‌इनफ  * एम स्टेनली व्हिटिंगम * अकीरा योशिनो ) इन्हें लिथियम-आयन बैटरी बनाने के लिए यह पुरस्कार दिया गया है ।


3. चिकित्सा :-  

   इस बार चिकित्सा के क्षेत्र में भी तीन व्यक्तियों को नोबेल पुरस्कार दिया गया है :-
(* विलियम कैलीन * ग्रेग सीमेंजा * के० पीटर रैटक्लिफ )
इन्होंने कोशिकाओं में जीवन और आक्सीजन को ग्रहण करने में एक महत्वपूर्ण योगदान दिया था जिसके लिए इन्हें संयुक्त रूप से चिकित्सा के क्षेत्र में यह पुरस्कार मिला है ।


4. साहित्य :-

 पीटर हेंडके को इस बार साहित्य के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।



5. शांति :- 

इस बार शांति के क्षेत्र में इथोपिया के प्रधानमंत्री एबे अहमद अली को दिया गया जो शांति का नोबेल पुरस्कार पाने वाले 100वें व्यक्ति हैं ।


6. अर्थशास्त्र:-

इस बार अर्थशास्त्र के क्षेत्र में तीन व्यक्तियों को यह सम्मान दिया गया है :-
(* अभिजीत बनर्जी * एस्थर डुफ्लो * माइकल क्रेमर)
इन्होंने "वैश्विक गरीबी खत्म करने के प्रयोग" पर शोध किया था जिसके लिए इन्हें संयुक्त रूप से अर्थशास्त्र के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार दिया गया ।




कुछ प्रमुख तथ्य :-



1. सन् 1937, 1938,1939, 1947, एवं 1948 में गांधी जी का नाम नोबेल पुरस्कार के लिए नामित हुआ था शांति के क्षेत्र में अटूट और अनमोल योगदान के लिए परंतु दुःख की बात है कि उन्हें कभी यह सम्मान नहीं प्राप्त हुआ ।

2. अबतक के आंकड़ों के अनुसार मलाला यूसुफजई (17) को सबसे कम उम्र में और लियोनिद हरक्विज (90) को सबसे अधिक उम्र में यह पुरस्कार प्राप्त है ।

3. मरणोपरांत नोबेल पुरस्कार दो व्यक्तयों को प्राप्त है :-  सन् 1931 ई० में एरिक एक्सेल कार्लफल्डट को और सन् 1968 में डैम हैमरसोल्ड को ।


4. रेड क्रॉस संस्था को 3 बार  शांति का नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है । ( 1917, 1944, 1963)


तो ये थे कुछ महत्वपूर्ण जानकारी जो मैंने आप सबके बीच Share किया.....तो Comment Box में जरूर बताएं कि आप सबको कैसे लगी मेरी ये post.

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