ये कविता मैं उन सभी Aspirants के लिए समर्पित कर रहा हूं जो लाख कठिनाइयों के बावजूद अपने सपनों से कभी समझौता नहीं किया है और अब भी अपने सपनों को साकार करने के प्रति लगातार प्रयासरत हैं।
ये टूटी हुई दीवारें....
जो हल्की सी आंधियों से टपकती छतें
पास में बिखरी हुई किताबें....
और ये कुछ अलग कर गुजरने की अपने सपने....!!!
काश! कोई समझ पाता इन किताबों के पन्नों के पीछे छुपे संघर्षों को.....!!!
जो बार-बार मुझे तोड़ने की कोशिश करते
और हर बार मैं उन सपनों को फिर से जोड़ने की कोशिश करता हूं।
Written by ( Lakshman Tudu)